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विक्रमशिला संग्रहालय में आपका स्वागत है

Posted by on Apr 2, 2013 in Uncategorized | Comments Off

विक्रमशिला संग्रहालय में आपका स्वागत है

पुरातातिवक संग्रहालय, विक्रमशिला  अंतीचक, जिला भागलपुर ;बिहार

23 नवम्बर 2004 को स्थापित इस संग्रहालय में प्रदर्शित पुरावस्तुएं समीपवर्ती उत्खनित पुरतातविक  स्थल से प्राप्त हुर्इ हैं जिसकी पहचान पाल कालीन 8वीं-12वीं शताब्दी प्राचीन विक्रमशिला विश्वविधालय से की गर्इ है। अपने उत्कर्ष काल में विक्रमशिला विश्वविधालय की साख नालन्दा विश्वविधालय जैसी ही थी। यह संस्थान तन्त्रावाद की शिक्षा के लिए विशेष रूप से प्रसिद् था।
विक्रमशिला पुरास्थल के उत्खनन से एक विशाल वर्गाकार महाविहार अनावृत हुआ है जिसके केन्द्र में क्रास आकार का द्विमेधि स्तूप तथा दक्षिण पशिचम कोने से जुड़ा एक पुस्तकालय है।

 

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हमारे बारे में

Posted by on Sep 15, 2010 in Uncategorized, हमारे बारे में | Comments Off

हमारे बारे में

विक्रमशिला संग्रहालय

सन २००४ में विक्रमशिला संग्रहालय कि स्ताहपना कि गई।  इसका उदेश्या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण  द्वारा  विक्रमशिला महाविहार  के पास कि हुई खुदाई से प्राप्त अवशेषों का आम जनमानस के लिए प्रदर्शन था।  यह संग्रहालय विक्रमशिला महविहार के खुड्डे स्थल के पास ही बना है।  विक्रमशिला महाविहार पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में किआ गया था।

विक्रमशिला पुरास्थल के उत्खनन से एक विशाल वर्गाकार महाविहार अनावृत हुआ है जिसके केन्द्र में क्रास आकार का द्विमेधि स्तूप तथा दक्षिण पशिचम कोने से जुड़ा एक पुस्तकालय है। मेधि भितितयों पर सुसजिजत मृण्यमय पफलक विशिष्ठ आकर्षण हैं।
प्राप्त पुरावशेषों में बु(,अवलोकितेश्वर, लोकनाथ, महाकाल, तारा सहित बौ( प्रतिमाओं की बहुलता है। तथापि गणेश, उमा महेश्वर, सूर्य, कृष्ण-सुदामा, कुबेर, महिषासुरमर्दिनी, नवग्रह इत्यादि हिन्दू देवी देवताओं की उपसिथति महत्वपूर्ण है। समस्त प्रतिमाएं विशिष्ट पाल कला शैली में उत्कीर्ण की गर्इ हैं। काले कसौटी  पत्थर में बनी कुछ प्रतिमाओं में एक विशिष्ट चमक है। कांस्य प्रतिमाए भी अत्यन्त आकर्षक हैं तथा नालन्दा व कुर्किहार की कांस्य प्रतिमाओं से तुलनीय हैं।
अन्य संरक्षित पुरावस्तुओं में उल्लेखनीय हैं मृण्मय मानव, पशु तथा पक्षी कलाकृतियांय मृण्मय खिलौनेय झुनझुनेय त्वचामार्जकय मुद्राए एवं मुद्राकनय पत्थर, कांच तथा मिटटी के मनकेय गृहोपयोगी मृदभांडय सिक्के, अभिलेखय हडडी तथा हस्तदंत की वस्तुएंय आभूषणय मृगसींगय लौह बाणाग्र, भाले, ढालय तांबे तथा कांस्य की वस्तुएं इत्यादि।

 

 

 

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भू – तल वीथिका

Posted by on Sep 15, 2010 in भूतल वीथिका | Comments Off

भू – तल वीथिका

 

कुल १३१ पुरततविक वस्तुएं प्रदर्शित है जिनमे प्रमुख हैं : बौद्ध  एवं हिन्दू  प्रतिमाएं , वास्तु अवशेष , मृण्मूर्तिया  ,मानव, पशु, पक्छी , खिलौने एवं मनके , धातु के हथियार एवं औजार , पत्थर के दीप एवं बर्तन इत्यादि।

 

 

पीठिका पर प्रदर्शित प्रतिमाएं एवं वास्तु खंड

. गणेशा
. लोकनाथ
. नवग्रह
. तारा
. तारा ( खंडित )
. सयुंक्त सिंह
. सूर्य
. महाकाल
. अवलोकितेश्वर
. वास्तु खंड

 

 

 

गणेशा

• आदि देवता के रूप में प्रतिषिठत
• भगवान शिव एवं पार्वती के पुत्र
• वास्तु अलंकरण हेतु उत्कीर्ण
• चूना पत्थर से निर्मित

 

लोकनाथ

• बौद्ध देवता अवलोकितेश्वर का एक रूप
• पुषिपत कमल पर अद्र्धपर्यंक आसन में विराजमान
• सूक्ष्म विवरण तथा अलंकरण की सुन्दरता उल्लेखनीय
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

नवग्रह

• सौर मंडल के नौ ग्रहों का मानव स्वरूप में चित्रण
• अधोभाग सिथत पटिटका में संबंधित प्रतीक वाहनों का अंकन
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

तारा

• सर्वाधिक लोकप्रिय बौद्ध देवी
• वैभव, समृद्धि एवं पराक्रम की देवी
• वस्त्र एवं आभूषण के सूक्ष्म विवरणों का सुन्दर अंकन
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

तारा ( खंडित )

• वैभव, समृद्धि एवं पराक्रम की बौद्ध देवी
• अधिक उभार युक्त अंकन
• वस्त्र एवं आभूषण के सूक्ष्म विवरणों का सुन्दर अंकन
• पुषिपत कमल पर अद्र्धपर्यंक आसन में विराजमान
• विशेष चमक युक्त
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से  निर्मित

 

सयुंक्त सिंह

• एक मस्तक के साथ संयुä दो शरीर के रूप में शिलिपत सिंह
• वास्तु निर्माण में अलंकरण हेतु शिलिपत
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

सूर्य

• मानव जीवन के स्त्रोत प्राकृतिक प्रकाश बल का  मानव रूप में अंकन
• अंधकार का विध्वंसक
• दोनों हाथों में पूर्ण पुषिपत कमल के साथ खड़े तथा  उंचा जूता पहने हुए
• चूना पत्थर से निर्मित

 

महाकाल

• शत्रुओं के विनाशक के रूप में आराध्य तांत्रिक  कर्मकाण्ड के रौद्र देवता
• खुले मुख, बड़े दांत तथा बढ़ी हुर्इ दाढ़ी व मूछों  के साथ उन्नतोदर वामन के रूप में शिलिपत
• चार हाथों में शंख, कपाल, त्रिशूल व कटोरा तथा  गले में नरमुण्ड की माला धारण किये हुए
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

अवलोकितेश्वर

• सर्वाधिक लोकप्रिय बौद्ध देवता
• संसार का सभी दिशाओं से अवलोकन करने वाले  देव
• कमल पुष्प की लता पकड़े हुए अंकित
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

 वास्तु खंड

 

• पूर्वी भित्ति  मंजूषा

• बौद्ध तथा हिन्दू धर्मों के विभिन्न देवी देवताओं की मूर्तियां
• बौद्ध प्रतिमाओं में प्रमुख हैं : बुद्ध-मस्तक, अवलोकितेश्वर का मस्तक, अवलोकितेश्वर का धड़, मारिची, इत्यादि
• हिन्दू प्रतिमाओं में मुख्यत: गणेश एवं विष्णु की मूर्तियां
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध, लाल एवं चूना पत्थरों इत्यादि माध्यमों में उत्कीर्ण प्रतिमाएं

 

पषिचमी भित्ती  मंजूषा

• मृण्मय कलाकृतियां प्रदर्शित
• मनके, झुनझुने, झुमके, छिदि्रत पात्र, मंदिर शिखर, पशु ;सिंह, कछुआ, कुŸाा, घडि़याल
तथा हाथीद्धए पक्षी ;उल्लूद्धए इत्यादि

 

• दक्षिणी भित्ती  मंजूषा

• विभिन्न मृण्मय कलाकृतियों का संग्रह
• मानव मस्तक एवं धड़ ;पुरूष एवं नारी, भूमिस्पर्श मुद्रा में बुद्ध, गणेश प्रतिमा, मृण्मय
सांचा जिसमें स्तूप, मनौती स्तूप समूह, बुद्ध एवं बौद्ध पंथ का अंकन है

.

• केन्द्रीय मेज मंजूषा

• विभिन्न माध्यमों यथा पत्थर, लोहा एवं मृण्मय कलाकृतियां
• मृण्मय वस्तुओं में मनके तथा चक्के
• पाषाण वस्तुओं में दीप तथा कटोरे
• लौह वस्तुओं में खंजर, तलवार, हंसुआ, कुल्हाड़ी, कांटी तथा अंगूठी

 

 

 

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प्रथम तल वीथिका :

Posted by on Sep 15, 2010 in प्रथम तल वीथिका | Comments Off

प्रथम तल वीथिका :

 

कुल 440 पुरावस्तुएं प्रदर्शित हैं जिसमें प्रमुख हैं – बौद्ध एवं हिन्दू प्रतिमाएं, मुद्राएं एवं मुद्रांकन, सांचा, त्वचा मार्जक, क्रीड़ा वस्तुएं, आभूषण, विभिन्न माध्यमों यथा तांबा, कांसा, असिथ, शंख, हांथी दांत एवं मृग सींग से बनी हुर्इ कलावस्तुएं

 

 

पीठिका पर आश्रित प्रतिमाएं एवं वास्तु खण्ड

 

• बुद्ध
• गणेश
• सुर्य
• कृष्णा – सुदामा
•  महिसासुरमर्दिनी
•  चामुंडा
•  उमा महेश्वर

 

 

 

 

 

बुद्ध

• बुद्ध के जीवन से जुड़ी आठ प्रमुख घटनाओं का
चित्रण
• केन्द्र में सिथत भूमि-स्पर्श मुद्रा में प्रधान प्रतिमा
बोधगया में बुद्ध को ज्ञान प्रापित मिलने की घटना
दर्शाती है
• फलक के किनारों पर चित्रित सात लघु प्रतिमाएं
बुद्ध के जीवन की अन्य प्रमुख घटनाओं की धोतक
हैं। फलक के बायें नीचे से घड़ी की विपरीत दिशा
में बढ़ते हुए घटनाओं का क्रम इस प्रकार है -
लुमिबनी में जन्म, राजगीर में मादक हाथी का
वशीकरण, सारनाथ में प्रथम धर्मोपदेश, कुशीनगर में
महापरिनिर्वाण, श्रावस्ती का चमत्कार, संकीसा का
चमत्कार तथा वैशाली में वानर प्रमुख द्वारा मधु पात्र का अर्पण
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 गणेश

• उत्खनन स्थल से प्राप्त हिन्दू देवताओं में एक
प्रमुख प्रतिमा
• भगवान शिव एवं पार्वती के पुत्र, आदि देवता के
रूप में प्रतिषिठत
• समृद्धि  एवं कल्याण के देवता, विघ्नविनाशक
• नृत्य करते हुए शिलिपत
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

 

सुर्य

• मानव जीवन के स्त्रोत प्राकृतिक प्रकाश बल का मानव रूप में अंकन
• अंधकार का दमन करने वाले
• दोनों हाथों में पूर्ण पुषिपत कमल के साथ खड़े तथा उंचा जूता पहने हुए
• द्वार-स्थापत्य के अंश के रूप में प्रयुक्त खण्ड
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 कृष्णा – सुदामा

• भगवान कृष्ण और उनके बाल सखा सुदामा की
मित्रता की पौराणिक कथा का चित्रण
• सुदामा को बढ़ी हुर्इ दाढ़ी व हाथ में लाठी पकड़े
हुए कंकालवत काया में दर्शाया गया है जो निर्धनता
का धोतक है
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 महिसासुरमर्दिनी

• महिष असुर का दमन करती हुर्इ देवी दुर्गा
• बुरार्इ पर अच्छार्इ की विजय की प्रतीक घटना
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 चामुंडा

• शकित देवी का रौद्र रूप
• कंकालवत मानव रूप में अंकित
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 उमा महेश्वर

• भगवान शिव एवं पार्वती ;उमाद्ध आलिंगन की मुद्रा में
• पूर्ण पुषिपत कमल पर आसीन, दोनों का एक पैर
भी कमल पुष्प पर आश्रित
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

 

वास्तु खंड

• द्वार – स्थापत्य के अंश के रूप में प्रयुक्त
• विशाल एकात्मक वास्तु खण्ड आलीशान स्थापत्य
की ओर इंगित करता है
• सूक्ष्म विवरणों का सुंदर अंक अलंकृत स्थापत्य की
ओर इंगित करता है
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

पूर्व भित्ति मंजूषा

• असिथ, शंख, हाथी दांत तथा मृग सींग से बनी कलावस्तुएं
• मुद्राएं एवं मुद्रांकन, क्रीड़ा वस्तुएं, आभूषण, अंजन शलाका, पासा, अंगूठी, लघु स्तूप,
शंख से बनी वस्तुएं एवं टुकड़े, मृग सींग एवं अन्य वस्तुएं

 

पश्चिमी भित्ति मंजूषा

• मृण्मय तथा प्रस्तर की बनी कलावस्तुएं
• मृण्मय वस्तुओं में है – सांचा, मुद्राएं एवं मुद्रांकन, त्वचा-मार्जक इत्यादि
• प्रस्तर वस्तुओं में – खड़े हुए बुद्ध, अवलोकितेश्वर, जाम्भाल, अपराजिता, भूमि-स्पर्श
मुद्रा में बुद्ध, गणेश, पार्वती, कार्तिकेय तथा कुछ खंडित अंश

 

दक्षिणी  भित्ति मंजूषा

• धातु ;तांबा एवं कांसाद्ध से बनी कलावस्तएं
• खड़े हुए बुध्द, भूमि स्पर्श मुद्रा में बुध्द, तारा, मंजुश्री ;बौध्द देवीद्ध, पीठिका पर वराह,
घंटी, द्वार-कुंडी, मंदिर शिखर, कंगन, मनका, झुमके, नथुनी, अंजन शलाका, लोटा,
कटोरा इत्यादि

 

केंद्रीय मेज मंजूषा

विभिन्न आकार, आकृति एवं निर्माण पदार्थों ;यथा मृण, प्रस्तर, अध्र्द कीमती पत्थर, शीशाद्ध
से बने मनके

 

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भू – तल संग्रहालय

Posted by on Sep 15, 2010 in भू - तल | Comments Off

भू – तल संग्रहालय

 

भू – तल संग्रहालय

 

 

 

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