हमारे बारे में

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Posted by on Sep 15, 2010 in Uncategorized, हमारे बारे में | Comments Off

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विक्रमशिला संग्रहालय

सन २००४ में विक्रमशिला संग्रहालय कि स्ताहपना कि गई।  इसका उदेश्या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण  द्वारा  विक्रमशिला महाविहार  के पास कि हुई खुदाई से प्राप्त अवशेषों का आम जनमानस के लिए प्रदर्शन था।  यह संग्रहालय विक्रमशिला महविहार के खुड्डे स्थल के पास ही बना है।  विक्रमशिला महाविहार पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा ईसा पूर्व चौथी शताब्दी में किआ गया था।

विक्रमशिला पुरास्थल के उत्खनन से एक विशाल वर्गाकार महाविहार अनावृत हुआ है जिसके केन्द्र में क्रास आकार का द्विमेधि स्तूप तथा दक्षिण पशिचम कोने से जुड़ा एक पुस्तकालय है। मेधि भितितयों पर सुसजिजत मृण्यमय पफलक विशिष्ठ आकर्षण हैं।
प्राप्त पुरावशेषों में बु(,अवलोकितेश्वर, लोकनाथ, महाकाल, तारा सहित बौ( प्रतिमाओं की बहुलता है। तथापि गणेश, उमा महेश्वर, सूर्य, कृष्ण-सुदामा, कुबेर, महिषासुरमर्दिनी, नवग्रह इत्यादि हिन्दू देवी देवताओं की उपसिथति महत्वपूर्ण है। समस्त प्रतिमाएं विशिष्ट पाल कला शैली में उत्कीर्ण की गर्इ हैं। काले कसौटी  पत्थर में बनी कुछ प्रतिमाओं में एक विशिष्ट चमक है। कांस्य प्रतिमाए भी अत्यन्त आकर्षक हैं तथा नालन्दा व कुर्किहार की कांस्य प्रतिमाओं से तुलनीय हैं।
अन्य संरक्षित पुरावस्तुओं में उल्लेखनीय हैं मृण्मय मानव, पशु तथा पक्षी कलाकृतियांय मृण्मय खिलौनेय झुनझुनेय त्वचामार्जकय मुद्राए एवं मुद्राकनय पत्थर, कांच तथा मिटटी के मनकेय गृहोपयोगी मृदभांडय सिक्के, अभिलेखय हडडी तथा हस्तदंत की वस्तुएंय आभूषणय मृगसींगय लौह बाणाग्र, भाले, ढालय तांबे तथा कांस्य की वस्तुएं इत्यादि।

 

 

 

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