प्रथम तल वीथिका :

Posted by on Sep 15, 2010 in प्रथम तल वीथिका | Comments Off

प्रथम तल वीथिका :

 

कुल 440 पुरावस्तुएं प्रदर्शित हैं जिसमें प्रमुख हैं – बौद्ध एवं हिन्दू प्रतिमाएं, मुद्राएं एवं मुद्रांकन, सांचा, त्वचा मार्जक, क्रीड़ा वस्तुएं, आभूषण, विभिन्न माध्यमों यथा तांबा, कांसा, असिथ, शंख, हांथी दांत एवं मृग सींग से बनी हुर्इ कलावस्तुएं

 

 

पीठिका पर आश्रित प्रतिमाएं एवं वास्तु खण्ड

 

• बुद्ध
• गणेश
• सुर्य
• कृष्णा – सुदामा
•  महिसासुरमर्दिनी
•  चामुंडा
•  उमा महेश्वर

 

 

 

 

 

बुद्ध

• बुद्ध के जीवन से जुड़ी आठ प्रमुख घटनाओं का
चित्रण
• केन्द्र में सिथत भूमि-स्पर्श मुद्रा में प्रधान प्रतिमा
बोधगया में बुद्ध को ज्ञान प्रापित मिलने की घटना
दर्शाती है
• फलक के किनारों पर चित्रित सात लघु प्रतिमाएं
बुद्ध के जीवन की अन्य प्रमुख घटनाओं की धोतक
हैं। फलक के बायें नीचे से घड़ी की विपरीत दिशा
में बढ़ते हुए घटनाओं का क्रम इस प्रकार है -
लुमिबनी में जन्म, राजगीर में मादक हाथी का
वशीकरण, सारनाथ में प्रथम धर्मोपदेश, कुशीनगर में
महापरिनिर्वाण, श्रावस्ती का चमत्कार, संकीसा का
चमत्कार तथा वैशाली में वानर प्रमुख द्वारा मधु पात्र का अर्पण
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 गणेश

• उत्खनन स्थल से प्राप्त हिन्दू देवताओं में एक
प्रमुख प्रतिमा
• भगवान शिव एवं पार्वती के पुत्र, आदि देवता के
रूप में प्रतिषिठत
• समृद्धि  एवं कल्याण के देवता, विघ्नविनाशक
• नृत्य करते हुए शिलिपत
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

 

सुर्य

• मानव जीवन के स्त्रोत प्राकृतिक प्रकाश बल का मानव रूप में अंकन
• अंधकार का दमन करने वाले
• दोनों हाथों में पूर्ण पुषिपत कमल के साथ खड़े तथा उंचा जूता पहने हुए
• द्वार-स्थापत्य के अंश के रूप में प्रयुक्त खण्ड
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 कृष्णा – सुदामा

• भगवान कृष्ण और उनके बाल सखा सुदामा की
मित्रता की पौराणिक कथा का चित्रण
• सुदामा को बढ़ी हुर्इ दाढ़ी व हाथ में लाठी पकड़े
हुए कंकालवत काया में दर्शाया गया है जो निर्धनता
का धोतक है
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 महिसासुरमर्दिनी

• महिष असुर का दमन करती हुर्इ देवी दुर्गा
• बुरार्इ पर अच्छार्इ की विजय की प्रतीक घटना
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 चामुंडा

• शकित देवी का रौद्र रूप
• कंकालवत मानव रूप में अंकित
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

 उमा महेश्वर

• भगवान शिव एवं पार्वती ;उमाद्ध आलिंगन की मुद्रा में
• पूर्ण पुषिपत कमल पर आसीन, दोनों का एक पैर
भी कमल पुष्प पर आश्रित
• काले कसौटी ;बेसाल्टद्ध पत्थर से निर्मित

 

 

वास्तु खंड

• द्वार – स्थापत्य के अंश के रूप में प्रयुक्त
• विशाल एकात्मक वास्तु खण्ड आलीशान स्थापत्य
की ओर इंगित करता है
• सूक्ष्म विवरणों का सुंदर अंक अलंकृत स्थापत्य की
ओर इंगित करता है
• चूना पत्थर से निर्मित

 

 

पूर्व भित्ति मंजूषा

• असिथ, शंख, हाथी दांत तथा मृग सींग से बनी कलावस्तुएं
• मुद्राएं एवं मुद्रांकन, क्रीड़ा वस्तुएं, आभूषण, अंजन शलाका, पासा, अंगूठी, लघु स्तूप,
शंख से बनी वस्तुएं एवं टुकड़े, मृग सींग एवं अन्य वस्तुएं

 

पश्चिमी भित्ति मंजूषा

• मृण्मय तथा प्रस्तर की बनी कलावस्तुएं
• मृण्मय वस्तुओं में है – सांचा, मुद्राएं एवं मुद्रांकन, त्वचा-मार्जक इत्यादि
• प्रस्तर वस्तुओं में – खड़े हुए बुद्ध, अवलोकितेश्वर, जाम्भाल, अपराजिता, भूमि-स्पर्श
मुद्रा में बुद्ध, गणेश, पार्वती, कार्तिकेय तथा कुछ खंडित अंश

 

दक्षिणी  भित्ति मंजूषा

• धातु ;तांबा एवं कांसाद्ध से बनी कलावस्तएं
• खड़े हुए बुध्द, भूमि स्पर्श मुद्रा में बुध्द, तारा, मंजुश्री ;बौध्द देवीद्ध, पीठिका पर वराह,
घंटी, द्वार-कुंडी, मंदिर शिखर, कंगन, मनका, झुमके, नथुनी, अंजन शलाका, लोटा,
कटोरा इत्यादि

 

केंद्रीय मेज मंजूषा

विभिन्न आकार, आकृति एवं निर्माण पदार्थों ;यथा मृण, प्रस्तर, अध्र्द कीमती पत्थर, शीशाद्ध
से बने मनके